धीरे धीरे से भाग --- 18
रिया ने सिद्धांथ से कहा अगर आपका पागलपन खत्म हो गया हो तो कुछ काम की बात कर ले,,,,,
सिद्धांथ मुँह बना कर मन ही मन मे बोला इतनी रोमांटिक जगह पर तो बस रोमांस किया जाता है ना की तुम्हारी तरह फालतू बातो मे टाइम वेस्ट,,,,,,
रिया बोली उसे घूरते हुए बोली जैसे उसने उसके चेहरे पर उसके मन के भाव पड़ लिए हो अब मन ही मन बाते हो गयी हो तो मुँह भी खोल दो,,,,
सिद्धांथ बोला, तुम भी ना यर मेरे मूड की हर बार ऐसी की तैसी कर देती हो बोलो आप क्या बोलना चाहती हो,,
रिया मुस्कुराते हुए उसकी तरफ मुड़ी और उसने उसे की कोलर पकड़ कर अपनी ओर खींच ओर सिद्धांथ के गालों पर अपने मुलायम होंठ रख दिए,,,,,
अचानक से ये हुआ जिसकी उसे उम्मीद भी नहीं थी उसके होठो पर भी मुस्कान हो गयी,, ओर बोला अच्छा बताओ,,,,,
अपनी बाते कैसे मनवाई जाती है तुम्हे अच्छे से आता है ओर हँसने लगता है,,,,,
रिया थोड़ा इतराते हुए बोली,,, सो तो है,,,,,
अब चुप होकर मेरी बातों को अच्छे से सुनो और जो भी मैं तुमसे पूछूं उसका सच-सच जवाब देना अगर झूठ बोला ना तो देख लेना तुम्हारी खैर नहीं,,,,,
सिद्धांत बोला कि बाप रे सवाल पूछने से पहले ही इतनी बड़ी धमकियां दे रही हो तुम तो अरे भाई मेरा किसी लड़की वड़की से कोई चक्कर नहीं है जो भी है बस तुम्हारे साथ है उसके सिवा मैं किसी और को भी देखता तक नहीं हूं और यह सच तुम अच्छे से जानती हो अगर किसी ने मेरे बारे में तुम्हें कुछ बोला हो तो प्लीज यकीन मत करना ना जाने तुम्हें कौन-कौन मेरे बारे में भड़का देता है और तुम मुझ पर फट पड़ती हो बम की तरह,,,,,
रिया ने सिद्धांथ के मुँह पर अपना हाथ रखा और बोली बस चुप चुप अब एक शब्द और आगे कुछ नहीं बोलना अब जो बोलना है मैं बोलूंगी और तुम सुनोगे,,,,
सिद्धांत सर झुकाते हुए बोला,,,जो हुकुम
रिया बोली क्या मोहन के दिल में दीप्ती के लिए कुछ है बस हां या ना में जवाब देना इसके अलावा एक भी सवाल नहीं
सिद्धांत ने हाँ मे सर हिला दिया,,,,,
रिया बोली क्या मोहन दीप्ती को बहुत दिनों से चाहता है,,,,
सिद्धांत बोला हां मोहन दीप्ति को बहुत पसंद करता है वह अपनी लाइफ में दीप्ती के अलावा किसी और को जगह नहीं दे सकता पर उसके इंकार से उसको डर लगता है इसलिए आज तक उसने कभी उसे इस बात का जिक्र क्या इजहार तक नहीं किया ना ही उसे अभी तक पता चलने दिया है कि वह उसे कितना प्यार करता है,,,,
जब भी दीप्ती उसके के सामने आती है पूरी दुनिया का प्यार उसकी आंखों में उतर आता है उसके लिए उसे दीप्ती की खुशी के आगे कुछ और नहीं दिखाई देता मोहन दीप्ती को बेइंतहा प्यार करता है,,,,,
रिया बोली हां आज तक मुझे में इस बात का एहसास नहीं था पर पता नहीं क्यों आज उसकी आंखों में मैंने दीप्ती के लिए प्यार देखा उसके और दीप्ति के एक साथ बिताए हुए सारे लम्हे मेरी आंखों के सामने घूमने लगे उन सभी पलों में भी मैंn यही महसूस किया कि मोहन दीप्ती को चाहता है,,,,,
सिद्धांत में रिया का हाथ पकड़ा और बोला मैं मोहन को ऐसे नहीं देख सकते रिया, वह मर जाएगा पर दीप्ती के सामने कभी इस बात को कबूल नहीं करेगा ना ही इस बात का एहसास उसे होने देगा,,,,,,
क्या ऐसा नहीं हो सकता किसी को भी इस तरह का एहसास खुद बा खुद हो जाए और हमें कुछ करना ही ना पड़े,,,, क्या ऐसा हो सकता है रिया,,,,
रिया भी उसके हाथो को कस के पकड़ते हुए बोली बिल्कुल हो सकता है सिद्धांथ मे भी यही चाहती हूँ की दीप्ती की ज़िन्दगी मे खुशियाँ आए ना की वो अपनी पूरी ज़िन्दगी उन खुशियों के लिए तरसती रह जाए जो उसके नसीब मे थी पर हालत उसके हाथ मे नहीं,,,
रिया ने सिद्धार्थ को दीप्ती की शादी के बारे मे सब बता दिया और ये भी की वो लड़का उसे बहुत प्यार करता है पर दीप्ती को उसके प्यार मे ना जाने कुछ बेगानापन लगता है अपनापन का उसे एहसास ही नहीं होता,,,,,
सिद्धांथ बोला रिया हमारे पास ये आखरी मौका है हमें इन तीन दिनों मे जल्दी से जल्दी कुछ ना कुछ करना होगा,,,,,
किया दोनों मिल कर मोहन की मोहब्बत को उसके साथ ला कर खड़ा कर देंगे क्या करेगा मोहन उस समय जानने के लिए मिलते है धीरे धीरे से के अगले अंक मे,,,,,,
क्रमांश :
Anjali korde
15-Sep-2023 12:31 PM
Nice
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Babita patel
14-Sep-2023 11:09 AM
V nice
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hema mohril
13-Sep-2023 07:37 PM
Amazing
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